22 मई, 2025

कोई एक ख्वाब था…

कोई एक ख्वाब था…

जो तेरी आँखों से गिरकर
मेरे दिल में समा गया।

रात भर वो
तारों से बातें करता रहा,
और मैं…
तेरे नाम की चुप्पी ओढ़े
मुस्कुराता रहा।

सुबह आयी
तो वो ख्वाब
सच बन जाने की ज़िद करने लगा।

अब तू ही बता—
मैं उसे कैसे मना करता?


~योगेश 'अर्श' 🌸 

27 सितंबर, 2017

ऐसा नहीं के तुझसे मुहोब्बत नहीं
युँ भी नहीं के तेरी जरुरत नहीं
लेकिन तेरी हर बात पे सर झुका दूं
मेरे दिल को इसकी आदत नहीं

~योगेश 'अर्श'

19 जून, 2017

मुझे उसकी, उसे मेरी कोई खबर नही
हमराह है वो मेरा मगर हमसफर नही

योगेश 'अर्श'