कोई एक ख्वाब था…
जो तेरी आँखों से गिरकर
मेरे दिल में समा गया।
रात भर वो
तारों से बातें करता रहा,
और मैं…
तेरे नाम की चुप्पी ओढ़े
मुस्कुराता रहा।
सुबह आयी
तो वो ख्वाब
सच बन जाने की ज़िद करने लगा।
अब तू ही बता—
मैं उसे कैसे मना करता?
~योगेश 'अर्श' 🌸