12 अगस्त, 2010
रातभर सर्द हवा चलती रही
तेरी फुर्कत ने रातभर रुलाया हमें
मोम होते तो कब के पिघल जाते
चरागोंसा तेरी याद ने जलाया हमें
--योगेश ’अर्श’
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